Supreme Court Big Update: Live-In Relationships Under Section 498A – जानिए क्या है कोर्ट का नया आदेश और नियम

Supreme Court of India building and wedding outfits representing the new legal ruling extending cruelty protection to live-in relationships.
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए लिव-इन रिलेशनशिप को भी वैवाहिक क्रूरता (IPC 498A) के दायरे में शामिल कर लिया है।
इस निर्णय के बाद, 'शादी जैसी प्रकृति' वाले लिव-इन जोड़ों को भी घरेलू हिंसा के खिलाफ कानूनी सुरक्षा का अधिकार प्राप्त हो गया है।

 H1. सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब 'लिव-इन रिलेशनशिप' को भी मिली वैवाहिक क्रूरता के खिलाफ कानूनी सुरक्षा

भारतीय न्याय व्यवस्था में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस नए निर्देश के बाद देश में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के कानूनी अधिकारों और सुरक्षा को लेकर स्थिति काफी हद तक बदल गई है। आइए इसे विस्तार से जानते हैं।

2. क्या है सुप्रीम कोर्ट का यह नया जजमेंट?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह फैसला दिया है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (Section 498A), जो आमतौर पर शादीशुदा महिलाओं को पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा दी जाने वाली क्रूरता (घरेलू हिंसा और प्रताड़ना) से बचाती है, वह अब उन लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू होगी जो 'शादी की प्रकृति जैसे' (In the nature of marriage) हैं।

 3. यह फैसला किस वजह से और क्यों आया?

अदालत में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे थे जहाँ लंबे समय तक साथ रहने, पति-पत्नी की तरह जीवन बिताने और सामाजिक रूप से जुड़े होने के बाद भी यदि रिश्ता बिगड़ता था, तो लिव-इन में रहने वाले पार्टनर (विशेषकर महिलाओं) के पास घरेलू हिंसा या क्रूरता के खिलाफ सीधे कानूनी सुरक्षा पाने के लिए स्पष्ट प्रावधानों की कमी महसूस होती थी। कोर्ट ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह फैसला दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो रिश्ते असल में शादी की तरह ही निभाए जा रहे हैं, उनमें यदि किसी प्रकार की प्रताड़ना या शोषण होता है, तो कानून की नजर में उन्हें भी उचित सुरक्षा मिल सके।

 H2. आम नागरिकों और जोड़ों के लिए इसका क्या मतलब है?

कानूनी दायरा: यदि कोई जोड़ा लंबे समय से पति-पत्नी की तरह साथ रह रहा है, तो उस रिश्ते को कानूनन 'मैरिज लाइक रिलेशनशिप' माना जाएगा।

सुरक्षा का अधिकार: इस आदेश के बाद, यदि ऐसे रिश्तों में किसी भी पक्ष के साथ क्रूरता या उत्पीड़न होता है, तो वे कानून और धाराओं के तहत अपनी सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।

बदलाव की शुरुआत: यह फैसला देश के पारिवारिक और सामाजिक परिदृश्य में लिव-इन रिश्तों को लेकर कानूनी जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अस्वीकरण: Jankari Kendra वेबसाइट पर दी जाने वाली यह जानकारी केवल आम नागरिकों और पाठकों को जागरूक करने के उद्देश्य से है। यह किसी भी प्रकार की आधिकारिक कानूनी सलाह (Legal Advice) नहीं है। किसी भी कानूनी मामले या विवाद की स्थिति में योग्य और पेशेवर वकील से सलाह अवश्य लें। हम किसी भी फैसले या उससे होने वाले परिणामों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

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