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अब 15 दिन से ज्यादा भी हो सकेगी पुलिस कस्टडी! सुप्रीम कोर्ट के इस नए और कड़े आदेश ने उड़ा दी अपराधियों की नींद

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सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले पर आधारित विश्लेषणात्मक चित्र जिसमें नए आपराधिक कानूनों के तहत पुलिस कस्टडी को 15 दिन से आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। इसमें जांच एजेंसियों की बढ़ती शक्तियों और कानूनी प्रक्रिया को दर्शाया गया है।  देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। अक्सर अपराधियों और आरोपियों के वकीलों की तरफ से यह दलील दी जाती थी कि पुलिस हिरासत (Police Custody) की अधिकतम सीमा शुरुआती 15 दिनों तक ही सीमित होती है। लेकिन अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले पर स्थिति एकदम साफ कर दी है, जिससे अपराधियों और भ्रष्टाचारियों की रातों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस नए और कड़े फैसले के तहत पुलिस को कौन सी बड़ी ताकत मिलने जा रही है। १. क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला और 15 दिन की सीमा का सच? (The Supreme Court Ruling on Police Custody): 15 दिन की पारंपरिक सीमा से आगे की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों के तहत जांच की गंभीर ज...

Supreme Court Clarifies: Deletion from Electoral Roll Does Not Mean Loss of Citizenship

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  ভোটার তালিকা থেকে নাম বাদ যাওয়া মানেই নাগরিকতা হারানো নয়: সুপ্রিম কোর্টের গুরুত্বপূর্ণ নির্দেশ (ছবিতে ভারতের সুপ্রিম কোর্ট ভবনের সামনে একজন আইনজীবী এই বিষয়টি ব্যাখ্যা করছেন।) সম্প্রতি সুপ্রিম কোর্ট ভোটার তালিকা সংক্রান্ত একটি বিষয়ে অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ রায় দিয়েছে, যা লক্ষ লক্ষ নাগরিকের মনে স্বস্তি ফিরিয়ে আনতে পারে। ভোটার তালিকা থেকে নাম বাদ যাওয়া নিয়ে যে বিভ্রান্তি ও আতঙ্ক তৈরি হয়েছিল, তার পরিপ্রেক্ষিতে শীর্ষ আদালতের এই পর্যবেক্ষণ অত্যন্ত তাৎপর্যপূর্ণ। সুপ্রিম কোর্টের রায়ের মূল বিষয়গুলি: নাগরিকতা এবং ভোটার তালিকা: সুপ্রিম কোর্ট স্পষ্টভাবে জানিয়েছে যে, ভোটার তালিকা (Electoral Roll) থেকে কারও নাম বাদ যাওয়া মানেই সেই ব্যক্তির নাগরিকতা বাতিল হয়ে যাওয়া নয়। নাগরিকতা হারানোর সাথে ভোটার তালিকার নামের কোনো সরাসরি সম্পর্ক নেই। নির্বাচন কমিশনের এক্তিয়ার : আদালত জানিয়েছে, নির্বাচন কমিশনের (ECI) পুরো নিয়ন্ত্রণ আছে ভোটার তালিকা সংশোধন বা আপডেট করার উপর। তবে, ভোটার তালিকা থেকে নাম বাদ দেওয়া মানেই সেই ব্যক্তির নাগরিকতা নিয়ে প্রশ্ন তোলার অধিকার কমিশনের নেই। কেন্দ্র সরকারের কাছে রেফার করার দায়িত্ব...